सोमवार, 20 सितंबर 2021

यह सोच भटका हुआ मंजिल परख जायगा


 कही ना कहीं तो हर सड़क जायगा


सबको पता है उसका ठिकाना घोसला ही होगा

परिंदा आसमा छूते छूते जब थक जायगा


चिंगारी दरकार नही मोहब्बत ए आतिश को

महज एक दीदार से ये शोला भड़क जायगा


बे-अदब है ये लोग नजरे नही झुकायेंगे

बदन से जो दुप्पटा सरक जायगा


किसी बेघर को घर मे पनाह देकर देखो

घर का कोना कोना महक जायगा


घर के छज्जे पर रख देना आब का प्याला

कोई प्यासा परिंदा चहक जायगा


गजलो में दर्द इतना लिखता है  हिरू

एक दिन बादल भी रो कर बरस जायगा

2 टिप्‍पणियां:

धन्यवाद्

EXPERIENCE QUITE

कभी दुख का अनुभव किया, कभी सुख का अनुभव किया, इन्हीं से जिंदा हूं मैं, ये मैंने अनुभव किया।