कही ना कहीं तो हर सड़क जायगा
सबको पता है उसका ठिकाना घोसला ही होगा
परिंदा आसमा छूते छूते जब थक जायगा
चिंगारी दरकार नही मोहब्बत ए आतिश को
महज एक दीदार से ये शोला भड़क जायगा
बे-अदब है ये लोग नजरे नही झुकायेंगे
बदन से जो दुप्पटा सरक जायगा
किसी बेघर को घर मे पनाह देकर देखो
घर का कोना कोना महक जायगा
घर के छज्जे पर रख देना आब का प्याला
कोई प्यासा परिंदा चहक जायगा
गजलो में दर्द इतना लिखता है हिरू
एक दिन बादल भी रो कर बरस जायगा

nice
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