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छोटे पर्दे के चर्चित कलाकार श्री सिद्धार्थ शुक्ला का 'हार्ट अटैक' से निधन हो गया है।
समझते हैं कि हार्ट अटैक को कैसे दूर रखा जा सकता है, ख़ासकर तब जब युवाओं को भी चपेट में ले रहा है। जब दिल को खून की सप्लाई बंद हो जाती है तभी हार्ट अटैक होता है। क्यों बन्द हो जाती है? दिल को सप्लाई करने वाली नलियाँ संकरी होती जाती हैं, जाम होती जाती हैं, जाम करने वाली गन्दगी एक दिन फटकर बिखर जाती है और दिल को खून की सप्लाई पूरी तरह बन्द हो जाती है और दिल ऑक्सीजन के अभाव में बहुत जल्द दम तोड़ देता है। क्या है वह गन्दगी? उसका नाम LDL और TRIGYCERIDE है। कहानी को संक्षिप्त करते हुए सीधे समझ लेते हैं कि क्या-क्या करने से हम सुरक्षित रहेंगे या रिस्क फैक्टर कौन कौन हैं:
1. चिंता-तनाव: यह सबसे प्रमुख कारणों में से एक है। चिंता समयानुकूल ठीक है लेकिन जीवन पर्यंत चिंता का मतलब है कि आपको जीवन जीने नहीं आता। जीवन पर्यंत चिंता आपके पूरे शरीर को बर्बाद कर देगी, दिल क्या चीज़ है।
2. अपच: अगर भोजन का पाचन उत्तम नहीं है तो पूरे शरीर में रोग पैदा करेगा। दिल, दिमाग, किडनी, फेफड़ा, लिवर सब खराब कर देगा।
3. शारीरिक श्रम का अभाव: बहुत बड़ा रिस्क फैक्टर है। आपको प्रतिदिन कम से कम एक घण्टे शारीरिक श्रम करना ही होगा, चलना, दौड़ना, तैरना, साईकल चलाना, कूदना, जॉगिंग, बर्तन माजना, झाड़ू पोंछा, कपड़ा साफ करना, बोझ ढोना आदि, कुछ भी। मानसिक श्रम अलग है।
4. तंबाकू: बीड़ी, सिगरेट, गुटखा आदि।
5. अधिक माँसाहार: आपका शरीर मांस के लिए डिज़ाइन नहीं है। सीमित खाएं।
6. दम्भ में रहना, दूसरे को कुछ न समझना: यह भी सामने आ रहा है शोधों में। जमीन से जुड़े रहें, मिलजुल कर रहें, यह दिल को स्वस्थ रखता है।
7. चीनी, मैदा, नमक कम से कम या न खाएं।
8. प्राकृतिक भोजन करें। चावल उगा, भूंसी फेक दिया, चावल को फिर पोलिश कर दिया, चावल उबालकर फ्राई कर दिया, वह भी बासी ले रहे, प्राकृतिक कहाँ रह गया। इसका पाचन कठिन होता है, फिर सड़ता है अंदर और रोगी बनाता है। भोजन वह लो जो तेजी से पचे।
और क्या-क्या करें कि दिल स्वस्थ रहे:
1.उपवास: बेहद ताकतवर व्यवस्था है।
2. प्राणायाम (प्राणायाम योग के आठ अंगों में से एक अंग है, चाहो तो और भी अंग करो।)
3. हंसें: जबरदस्ती या प्राकृतिक। लेकिन हंसे जरूर
4. सन्तोष रखें। हर चीज़ को हासिल करने की इच्छा न करें, सम्भव नहीं। कोई माई का लाल हर इच्छा पूर्ण नहीं कर सकता। इच्छा का गुलाम बनते ही इच्छा अनंत रूप धारण कर लेती है।
5. अपने प्रियजनों की खुशी में खुश रहा करें क्योंकि स्वयं के दुःखों को पूर्णतः समाप्त नहीं किया जा सकता।

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